News & Events
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परिसंवाद – संगोष्ठियाँ – कार्यशालाएँ :
(1986, सैप विभाग बनने के बाद से) 1998 : अनुवाद कार्यशाला
मध्यकालिन हिन्दी साहित्य और इक्कीसवीं सद
पिछले पाँच वषोँ में हुई – संगोष्ठियाँ :
2002 : दृश्य-श्रव्य माध्यम
विभागीय प्राध्यापकों द्वारा अकादमिक विदेश यात्रा डॉ. अरुणप्रकाश मिश्र (जार्जटाउन) गयाना 1990-93
स्थापना :2002 :कुल रंगकर्मी :आठ से दस नुक्कड़ नाटय – प्रस्तुतियाँ : अनुमानित – 376 (2002 से मार्च, 2007 तक) प्रस्तुत नाटक: चालो जीतवा जंग, स्वछता रे स्वछता, चलो स्कूल चलें, मेघल जीवजे जलनी धार, नाटक नहीं, पानी रे पानी, राजा का वाजा, औरत, एड्स : राक्षस, पढ़े-पढ़ाएं, ये गीर अपनी है प्रस्तुति क्षेत्र : आणंद ग्राम्य (चरोतर), बड़ौदा ग्राम्य (कानम), जूनागढ़ ग्राम्य (सौराष्ट्र) कच्छ (वागड़), अहमदाबाद (ग्राम्य), अलंग, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्य पुनर्बोधन पाठ्यचर्या –आयोजन :
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