News & Events

परिसंवाद – संगोष्ठियाँ – कार्यशालाएँ :

(1986, सैप विभाग बनने के बाद से)

1998 : अनुवाद कार्यशाला
1998 : पारसी रंगमंच और ख्याल परंपरा
1999 : महाप्राण निराला
2001 : कविवर सुमित्रानंदन पंत
2002 : दृश्य-श्रव्य माध्यम
2003 : कविता का रंगमंच
2003 : दृश्य-श्रव्य माध्यम :शैलि और संदेश
2004 : माध्यम की सामाजिक भूमिका
2005 : दूरदर्शन धारावाहिक :समाज मनोविज्ञान
2007 : मीडिया और विज्ञापन


मध्यकालिन हिन्दी साहित्य और इक्कीसवीं सद

पिछले पाँच वषोँ में हुई – संगोष्ठियाँ :

2002 : दृश्य-श्रव्य माध्यम
2003 : कविता का रंगमंच
2003 : दृश्य-श्रव्य माध्यम :शैलि और संदेश
2004 : माध्यम की सामाजिक भूमिका
2005 : दूरदर्शन धारावाहिक :समाज मनोविज्ञान
2007 : मीडिया और विज्ञापन
2008 मध्यकालिन हिन्दी साहित्य और इक्कीसवीं सद

विभागीय प्राध्यापकों द्वारा अकादमिक विदेश यात्रा

डॉ. अरुणप्रकाश मिश्र (जार्जटाउन) गयाना 1990-93
डॉ. नवनीत चौहाण (मारीशस) 2001


नटंडली(रेपर्टरी) एस ए पी – डी आर एस – यू.जी.सी. के तहत

स्थापना :2002 :कुल रंगकर्मी :आठ से दस

नुक्कड़ नाटय – प्रस्तुतियाँ :

अनुमानित – 376 (2002 से मार्च, 2007 तक)

प्रस्तुत नाटक:

चालो जीतवा जंग, स्वछता रे स्वछता, चलो स्कूल चलें, मेघल जीवजे जलनी धार, नाटक नहीं, पानी रे पानी, राजा का वाजा, औरत, एड्स : राक्षस, पढ़े-पढ़ाएं, ये गीर अपनी है

प्रस्तुति क्षेत्र :

आणंद ग्राम्य (चरोतर), बड़ौदा ग्राम्य (कानम), जूनागढ़ ग्राम्य (सौराष्ट्र) कच्छ (वागड़), अहमदाबाद (ग्राम्य), अलंग, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, मध्य

पुनर्बोधन पाठ्यचर्या –आयोजन :
1989 से अब तक : कुल पाठ्यचर्याएँ – बीस
नाटय कार्यशालाएँ एवं नाटयमहोत्सव : प्रतिवर्ष