From the Desk of the Head
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Welcome to the post graduate department of Hindi
स्वधिनता भारत के लोकनायकों ने सदियों के संधकार को चुनौती देते हुए देशभर में ज्ञान के अनेक दीपों को प्रज्जवलित किया था – नगरों के साथ ग्रामांचलो में भी । इसी परम्परा में, चरोतर (आणंद जनपद) अंचल में श्री भाईकाका तथा भीखाभाई पटेल ने अंचल के ग्राम-जनों के त्याग – सहकार से ज्ञान – साधना का एक दीप जलाया – सरदार पटेल विश्विवद्यालय में 1968 से सक्रिय स्नातकोत्तर हिन्दी-विभाग प्रारंभ से ही प्रतिभा, वैदुष्य और कर्मठता के मानक आचार्यो और साहित्य - सर्जकों के आप्तवचनों से लाभान्वित होता रहा है ।
विश्वविद्यालय के साथ ही साथ, हिन्दी विभाग ने भी राष्ट्रीय स्तर पर एक विशेष पहचान बनाई है । प्रेरक शोध-निर्देशकों तथा शिक्षकों, प्ररिश्रमी शोधार्थियों तथा स्थानीय, ग्रामीण, प्रान्तीय, अन्तर्प्रान्तीय छात्रों ने इस प्रांगण में एक अनवरत चलनेवाली शोध-यात्रा का आविष्कार किया है.... भारतीय जीवन और साहित्य, भाषा और सस्कृत, नाटक और रंगमंच शास्त्र, और लोक...।
आइए, इस यात्रा में आप भी हमारे साथ जुडे़....
विभागाध्यक्ष |
स्वधिनता भारत के लोकनायकों ने सदियों के संधकार को चुनौती देते हुए देशभर में ज्ञान के अनेक दीपों को प्रज्जवलित किया था – नगरों के साथ ग्रामांचलो में भी । इसी परम्परा में, चरोतर (आणंद जनपद) अंचल में श्री भाईकाका तथा भीखाभाई पटेल ने अंचल के ग्राम-जनों के त्याग – सहकार से ज्ञान – साधना का एक दीप जलाया – सरदार पटेल विश्विवद्यालय में 1968 से सक्रिय स्नातकोत्तर हिन्दी-विभाग प्रारंभ से ही प्रतिभा, वैदुष्य और कर्मठता के मानक आचार्यो और साहित्य - सर्जकों के आप्तवचनों से लाभान्वित होता रहा है ।